30.7.16

कुली का बेटा आखिर कैसे बना 100 करोड़ की कंपनी का मालिक

ये कहानी एक कुली के बेटे की है जो बाद में 100 करोड़ की कंपनी का मालिक बना। छठवीं क्लास में फेल भी हुआ मगर कभी हार नहीं मानी। रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, कालीकट जिसमें पढ़ने का लोगों का सपना होता है, उसमें दाखिला भी मिल गया।

Coolie’s Son Set Up 100 Crore Company


उन्होंने बचपन में ही सोच लिया था कि वो व्यवसायी बनेंगे और ग्रामीण लोगों को रोजगार देंगे, और उसने ये करके भी दिखाया। आज पी सी मुस्तफा की कंपनी के बने ताजा इडली और डोसे बैंगलोर, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, मंगलुरु और यहां तक की दुबई के घर-घर में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। लोग उनके जायके को पसंद कर रहे हैं। 

 वयनाड के छोटे से गांव चेन्नालोड में पले बढ़े पी सी मुस्तफा की  सक्सेस स्टोरी पढ़ कर आप आत्मविश्वास से भर जाएंगे। आगे की स्लाइड में देखें इस व्यक्ति की कामयाबी की पूरी कहानी।

शिक्षक ने पूछा था कुली बनना चाहोगे या शिक्षक

कुली का बेटा आखिर कैसे बना 100 करोड़ की कंपनी का मालिक

पी सी मुस्तफा का गांव इस कदर पिछड़ा था कि वहां पढ़ाई के लिए केवल एक प्राइमरी स्कूल था। वहां न तो सड़कें थी और न ही बिजली। स्कूल जाने के लिए उन्हें 4 किलोमीटर दूर पैदल ही जाना पड़ता था। अधिकतर बच्चे प्राइमरी के बाद पढ़ना बंद कर देते थे। उनके पिता ने भी चौथी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और कुली का काम करने लगे थे। उनकी मां ने तो कभी स्कूल का मुंह देखा तक नहीं। 

बचपन में उन्हें भी पढ़ाई में कोई दिलचस्पी नहीं थी। स्कूल के बाद और छुट्टी के दिनों में वो सामान ढोने में अपने पिता की मदद करते थे। रात में किताबें खोलने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता क्योंकि बिजली तो थी ही नहीं। वो सभी विषयों में सामान्य से भी कम थे। केवल उनकी गणित अच्छी थी। छठवीं में फेल होने के बाद उनका स्कूल जाने में भी मन नहीं लगता था। उनके पिता ने उन्हें कुली बनने के लिए कहा।  लेकिन उनके गणित के शिक्षक को ऐसे उनका स्कूल छोड़ना पसंद न आया। उन्होंने उनके पिता से बात की जिससे उनके पिता उन्हें एक और मौका देने के लिए तैयार हो गए।

इसके बाद उनके शिक्षक ने उनसे पूछा कि तुम एक कुली बनना चाहोगे या शिक्षक? मुस्तफा ने अपने शिक्षक को ध्यान से देखा और अपने पिता के बारे में सोचा। अपने शिक्षक को उन्होंने जवाब दिया कि मैं आपकी तरह एक शिक्षक बनना चाहता हूं। लेकिन सब कुछ इतना आसान नहीं था। जब वो वापस स्कूल पहुंचे तो उन्हें अपने से छोटी कक्षा वाले बच्चों के साथ बैठना पड़ा। उनके सभी दोस्त उनसे एक कक्षा ऊपर पहुंच चुके थे। उनको बहुत शर्मींदगी महसूस हो रही थी। 

वो हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में कमजोर थे। लेकिन उनके गणित के शिक्षक ने उनकी बहुत मदद की। अपने कठिन परिश्रम के बलबूते सातवीं कक्षा में उन्होंने टॉप करके अपने शिक्षकों को आश्चर्यचकित कर दिया। उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। हाईस्कूल की परीक्षा में भी वो पूरे स्कूल में अव्वल आए। उस समय उनका बस एक ही सपना था कि वो अपने गणित शिक्षक की तरह बनें। 

सहपाठी मजाक उड़ाते थे

कुली का बेटा आखिर कैसे बना 100 करोड़ की कंपनी का मालिक

दसवीं के बाद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। आगे की पढ़ाई के लिए वो कोष़िक्कोड कालीकट चले गए। लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए उनके पिता के पास पैसे नहीं थे। फिर उनके पिता के दोस्त ने बेटे का दाखिला फारुख कॉलेज में कराने का सुझाव दिया। जहां उनका खाना और रहना फ्री था। वहां उन्हें दाखिला भी मिल गया।

वहां चार हॉस्टल थे। उन्हें खाने के लिए रोज अलग अलग हॉस्टल में जाना पड़ता था क्योंकि उनका खाना चैरिटी पर निर्भर था। दूसरे छात्र उन्हें हेय नजरों से देखते थे। कुछ तो उनका मजाक भी उड़ाते थे। लेकिन उनपर तो पढ़ाई का धुन सवार था। उन्होंने इसपर कोई ध्यान नहीं दिया और मन लगाकर पढ़ाई करते रहे।  

गांव से आने के समय उनकी अंग्रेजी बहुत खराब थी, लेकिन कॉलेज में लेक्चर अंग्रेजी में ही होते थे। जिसे समझने में उन्हें बहुत परेशानी होती थी। उनका एक दोस्त रोज उन्हें पूरे लेक्चर का अनुवाद करके समझाता था। रुकावटें उनका कुछ न बिगाड़ पाईं और यहां भी वो अच्छे अंकों से पास हुए। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग में दाखिले की परीक्षा दी जिसमें उन्हें 63वां रैंक मिला और उनका दाखिला रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज जिसे अब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कहा जाता है, में हो गया। 

यहां उन्होंने सफल व्यवसायी बनने का सपना देखा। और सिर्फ देखा ही नहीं उसे पूरा भी किया। आज वो एक सफल व्यवसायी हैं और दूसरे लोगों को रोजगार दे रहे हैं। उम्मीद है कुली के बेटे की ये सक्सेस स्टोरी आपको जीवन में कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देगी। आपको ये कहानी कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं।

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